1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहे New Income Tax Draft को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। इस प्रस्तावित कानून के तहत वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने और टैक्स चोरी पर रोक लगाने के लिए PAN (Permanent Account Number) को और अधिक सख्ती से अनिवार्य किया जाएगा। बैंकिंग ट्रांजैक्शन, प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री, म्यूचुअल फंड निवेश, शेयर बाजार और अन्य हाई-वैल्यू लेन-देन में सही और अपडेटेड PAN देना जरूरी होगा। यदि किसी व्यक्ति ने अपने PAN को आधार, बैंक खाते या निवेश प्लेटफॉर्म से लिंक नहीं किया है, तो उसे भविष्य में लेन-देन में रुकावट, अतिरिक्त टैक्स कटौती या नोटिस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
नए ड्राफ्ट के अनुसार, आयकर विभाग डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत करेगा। बड़ी नकद जमा-निकासी, सालाना निर्धारित सीमा से अधिक बैंक ट्रांजैक्शन, फिक्स्ड डिपॉजिट, डिमैट अकाउंट, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड में निवेश जैसे मामलों में PAN अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा। इसके अलावा, रियल एस्टेट सेक्टर में भी सख्ती बढ़ाई जाएगी। प्रॉपर्टी की खरीद, बिक्री, लीज एग्रीमेंट और भारी एडवांस भुगतान में PAN की सही जानकारी देना जरूरी होगा। यदि कोई व्यक्ति गलत PAN देता है या अपडेट नहीं करता, तो ट्रांजैक्शन रोका जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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सरकार का मानना है कि इन कदमों से टैक्स बेस बढ़ेगा और फर्जी लेन-देन पर रोक लगेगी। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म पर भी KYC प्रक्रिया को और कड़ा किया जाएगा। जिन खातों में PAN अपडेट नहीं है या आधार से लिंक नहीं है, वहां उच्च दर से TDS कट सकता है और रिफंड में देरी हो सकती है। इसके साथ ही, आयकर विभाग संदिग्ध लेन-देन की निगरानी बढ़ाएगा और जरूरत पड़ने पर नोटिस जारी कर सकता है। इसलिए सभी टैक्सपेयर्स के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपने वित्तीय दस्तावेज समय रहते सही कर लें।
आम लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे तुरंत अपना PAN स्टेटस चेक करें और सुनिश्चित करें कि यह आधार से लिंक है। बैंक खाते, डिमैट अकाउंट, बीमा पॉलिसी, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश प्लेटफॉर्म में PAN विवरण सही तरीके से अपडेट होना चाहिए। यदि नाम, जन्मतिथि या अन्य जानकारी में अंतर है, तो पहले सुधार कराएं। आधिकारिक आयकर पोर्टल और सरकारी नोटिफिकेशन पर नजर बनाए रखें और किसी भी फर्जी कॉल, ईमेल या मैसेज से सावधान रहें। समय रहते अपडेट करने से भविष्य में आर्थिक परेशानियों और कानूनी झंझट से बचा जा सकता है।