Electricity department : बग्गा में दो महीने से बंद पड़े खोखाधारक को स्मार्ट मीटर से आया ₹82,059 का बिजली बिल, मचा हड़कंप

बग्गा क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब एक खोखाधारक, जिसकी दुकान पिछले दो महीनों से पूरी तरह बंद थी, को स्मार्ट मीटर के जरिए ₹82,059 का बिजली बिल थमा दिया गया। दुकान मालिक के अनुसार न तो इस अवधि में कोई बिजली उपकरण चला और न ही दुकान खोली गई, इसके बावजूद इतना बड़ा बिल आना हैरानी का कारण बन गया। स्थानीय लोगों ने भी इस मामले को लेकर चिंता जताई है, क्योंकि हाल के महीनों में पारंपरिक मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं और दावा किया गया था कि इससे बिलिंग में पारदर्शिता और सटीकता आएगी। लेकिन इस घटना के बाद स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

खोखाधारक का कहना है कि दुकान आर्थिक कारणों से दो महीने से बंद थी और बिजली का उपयोग लगभग शून्य था। बिल में दर्शाई गई यूनिट खपत वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। उन्होंने संबंधित बिजली विभाग कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है और मीटर की जांच की मांग की है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि बंद पड़ी दुकान का बिल इतना अधिक आ सकता है, तो अन्य उपभोक्ताओं को भी भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कई लोगों ने आशंका जताई कि कहीं मीटर रीडिंग में तकनीकी गड़बड़ी, डेटा सिंक्रोनाइजेशन की समस्या या गलत कैलकुलेशन तो नहीं हुई।

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बिजली विभाग की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद बिजली विभाग ने प्राथमिक जांच शुरू करने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, यदि बिल में किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि पाई जाती है तो उसे संशोधित किया जाएगा। स्मार्ट मीटर आमतौर पर रियल-टाइम डेटा रिकॉर्ड करते हैं और खपत की जानकारी सीधे सर्वर पर भेजते हैं, जिससे मानव त्रुटि की संभावना कम हो जाती है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि नेटवर्क गड़बड़ी, मीटर इंस्टॉलेशन में कमी या सॉफ्टवेयर अपडेट के दौरान तकनीकी समस्या के कारण भी असामान्य बिल जनरेट हो सकता है। इसलिए मीटर की भौतिक जांच और खपत के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की तुलना जरूरी है।

इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि स्मार्ट मीटर से जुड़े बिलों की नियमित ऑडिटिंग की जाए और उपभोक्ताओं को बिल समझाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। यदि उपभोक्ता को अचानक असामान्य बिल मिलता है, तो उसे तत्काल शिकायत दर्ज करने और भुगतान रोकने का अधिकार मिलना चाहिए, जब तक जांच पूरी न हो जाए। फिलहाल संबंधित खोखाधारक जांच के परिणाम का इंतजार कर रहा है, जबकि पूरे इलाके में इस मामले को लेकर चर्चा बनी हुई है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि नई तकनीक अपनाते समय मजबूत निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी होती है।

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