वैश्विक वित्तीय बाजारों में हाल के दिनों में सोना और अमेरिकी डॉलर दोनों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिसने निवेशकों और विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आम तौर पर सोना और डॉलर विपरीत दिशा में चलते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में दोनों एसेट मजबूत होते नजर आ रहे हैं। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग ने सोने की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा दिया है। वहीं डॉलर इंडेक्स में मजबूती अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिरता और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों के कारण देखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह असामान्य स्थिति निवेश रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है और आने वाले महीनों में कमोडिटी तथा करेंसी बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
तेजी के पीछे क्या हैं बड़े कारण
सोना और डॉलर दोनों की मजबूती के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारक काम कर रहे हैं। पहला बड़ा कारण सुरक्षित निवेश (safe haven) की मांग है—जब भी दुनिया में आर्थिक या राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सोने और डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। दूसरा कारण अमेरिका की मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदें हैं; यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो डॉलर मजबूत रहता है। तीसरा कारक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीद है, जिसने गोल्ड की कीमतों को सपोर्ट दिया है। इसके अलावा उभरते बाजारों में मुद्रा अस्थिरता और वैश्विक महंगाई के दबाव ने भी इन दोनों एसेट की मांग बढ़ाई है। यही वजह है कि पारंपरिक संबंधों के बावजूद दोनों में एक साथ तेजी देखने को मिल रही है।
भारतीय बाजार और निवेशकों पर असर
सोने और डॉलर की संयुक्त तेजी का भारतीय बाजार पर सीधा असर पड़ता है। मजबूत डॉलर के कारण रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयात महंगा हो जाता है—खासकर कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर प्रभावित होते हैं। वहीं सोने की कीमत बढ़ने से ज्वेलरी की मांग पर अल्पकालिक असर पड़ सकता है, लेकिन निवेश के रूप में गोल्ड की लोकप्रियता बढ़ जाती है। जो निवेशक गोल्ड ETF, सोना बॉन्ड या फिजिकल गोल्ड में निवेश करते हैं, उन्हें कीमत बढ़ने से फायदा मिल सकता है। हालांकि ऊंचे स्तर पर खरीदारी करते समय सावधानी जरूरी है, क्योंकि वैश्विक संकेत बदलते ही कीमतों में तेज करेक्शन भी आ सकता है। इसलिए विशेषज्ञ पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हैं।
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आगे क्या रह सकती है बाजार की दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में सोना और डॉलर दोनों की चाल वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है, जबकि मजबूत अमेरिकी डेटा डॉलर को ऊंचाई पर बनाए रख सकता है। हालांकि बाजार में किसी भी समय मुनाफावसूली या नीति बदलाव से उतार-चढ़ाव संभव है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल ट्रेंड देखकर जल्दबाजी में निवेश न करें, बल्कि अपने जोखिम प्रोफाइल और लंबी अवधि की रणनीति के अनुसार फैसला लें। कुल मिलाकर फिलहाल सोना और डॉलर की रिकॉर्ड तेजी बाजार के लिए बड़ा संकेत जरूर है, लेकिन आगे की दिशा डेटा और नीतिगत फैसलों से तय होगी।
निवेशकों के लिए रणनीतिक सलाह
मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को विविधीकरण (diversification) पर विशेष ध्यान देना चाहिए। केवल सोना या डॉलर आधारित एसेट में अत्यधिक निवेश करने के बजाय इक्विटी, डेट और गोल्ड का संतुलित मिश्रण बेहतर माना जाता है। लंबी अवधि के निवेशक चरणबद्ध निवेश (SIP या staggered buying) रणनीति अपनाकर कीमतों के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम कर सकते हैं। साथ ही, वैश्विक खबरों और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर नजर रखना भी जरूरी है, क्योंकि यही दोनों बाजारों की दिशा तय करते हैं। समझदारी और अनुशासन के साथ निवेश करने पर मौजूदा तेजी भी अवसर में बदली जा सकती है, लेकिन बिना योजना के निवेश जोखिम बढ़ा सकता है।
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